कई वर्षों के वेतन के लिए भटक रही एक महिला व एक बुजुर्ग वाचर, वन विभाग पर भुगतान न करने का आरोप

कई वर्षों के वेतन के लिए भटक रही एक महिला व एक बुजुर्ग वाचर, वन विभाग पर भुगतान न करने का आरोप
कई वर्षों के वेतन के लिए भटक रही एक महिला व एक बुजुर्ग वाचर, वन विभाग पर भुगतान न करने का आरोप

ब्यूरो रिपोर्ट : राजन प्रजापति 

महराजगंज रायबरेली। वन विभाग में कई वर्षों से कार्यरत एक महिला वाचर ने करीब 36 माह के बकाया वेतन का भुगतान न होने का आरोप लगाते हुए सम्पूर्ण समाधान दिवस एवं जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता ने विभागीय अधिकारियों पर वेतन रोकने तथा काम पर आने से मना किए जाने का आरोप लगाते हुए बकाया भुगतान कराए जाने की मांग की है। ग्राम पूरे कुमेदान राघोपुर, थाना बछरावां निवासी किस्मतुन निशा पुत्री सुल्तान खां ने दिए शिकायती पत्र में बताया कि वह वन विभाग की बछरावां रेंज के अंतर्गत पेड़ों की रखवाली एवं देखरेख का कार्य कई वर्षों से करती आ रही थी। इसके एवज में उसे प्रतिमाह 5,980 रुपये वेतन मिलता था। आरोप है कि पिछले करीब 36 माह से उसके वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2025 से उसे काम पर आने से भी मना कर दिया गया। महिला का आरोप है कि जब उसने अपने बकाया वेतन के भुगतान की मांग की तो उसे बताया गया कि रेंजर द्वारा वेतन जारी नहीं किया गया है। वहीं, रेंजर से संपर्क करने पर बीट इंचार्ज रमाकांत के माध्यम से वेतन दिलाए जाने की बात कही गई, लेकिन इसके बावजूद बकाया भुगतान नहीं हो सका।
पीड़िता ने शिकायती पत्र के माध्यम से अपने लंबे समय से लंबित वेतन का भुगतान कराए जाने तथा मामले में आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है। वहीं, इसी तरह वन विभाग में कार्यरत भगौती पुत्र राम आधार, निवासी पूरे चोखे, ग्राम पंचायत राघोपुर ने भी जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे भी कई वर्षों से कार्य के बदले मिलने वाला वेतन नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बकाया भुगतान कराने एवं मामले में कार्रवाई किए जाने की मांग की है। दो कर्मचारियों की ओर से बकाया वेतन को लेकर की गई शिकायतों से वन विभाग में कार्यरत वाचरों के भुगतान एवं उनकी कार्य स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। रमाकांत बीट इंचार्ज ने बताया लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद है भुगतान कर दिया गया है। अब देखना होगा कि विभागीय स्तर पर इन शिकायतों की जांच कब तक पूरी होती है और शिकायतकर्ताओं को उनका लंबित भुगतान कब तक मिल पाता है।